SANATAN DHARMA

सनातनी धर्म के प्रमुख ग्रंथों को कई भागों में विभक्त किया गया है। जिसमें चार वेद, चार ही उपवेद, बारह उपनिषद, छ: शास्त्र, अठारह पुराण और दो महाकाव्य शामिल किए गए हैं साथ ही श्रीमद् भागवतगीता और तुलसीदास जी के द्वारा लिखी गई रामचरित्रमानस को महत्वपूर्ण ग्रंथ माना गया है। इन ग्रंथों के द्वार बताए गए ज्ञान समूचे विश्व में अद्वितीय है।

चार वेद में ही सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का जटिल ज्ञान समेटे हुए सनातन धर्म विश्व का सबसे प्राचीन धर्म है। इसकी समस्त मान्यताएँ और परम्पराएँ बौद्धिक रूप से प्रभावशाली हैं। एक जीवन शैली है जो मनोवैज्ञानिक होने के साथ-साथ व्यावहारिक भी है। बौद्ध धर्म  हो या जैन धर्म या सिख धर्म सब इसी सनातन धर्म रूपी वट-वृक्ष की ही शाखाएँ-प्रशाखाएँ हैं।

SANATAN DHARMA

चार वेद –

  1. ऋग्वेद
  2. यजुर्वेद
  3. सामवेद
  4. अथर्ववेद

 

उपवेद –

  1. आयुर्वेद
  2. धनुर्वेद
  3. गंधर्ववेद
  4. स्थापत्यवेद

उपनिषद्

  1. ईश
  2. केन
  3. कठ
  4. प्रश्न
  5. मुण्डक
  6. माण्डूक्य
  7. तैत्तिरीय
  8. ऐतरेय
  9. छान्दोज्ञ
  10. कौषीतकी
  11. वृहदारण्यक
  12. श्वेताश्वर

हमारा आदर्श राष्ट्रीय वाक्य “सत्यमेव जयते” ‘मुण्डकोपनिषद्’ से लिया गया है।

छ:शास्त्र (वेदांग) –

  1. शिक्षा
  2. कल्प
  3. व्याकरण
  4. निरुक्त
  5. छंद
  6. ज्योतिष

अठारह पुराण –

  1. ब्रह्म पुराण
  2. पद्म पुराण
  3. विष्णु पुराण
  4. वायु पुराण
  5. भागवत पुराण
  6. नारद पुराण
  7. मार्कंडेय पुराण
  8. अग्नि पुराण
  9. भविष्य पुराण
  10. ब्रह्म वैवर्त पुराण
  11. लिंग पुराण
  12. वराह पुराण
  13. स्कन्द पुराण
  14. वामन पुराण
  15. कूर्म पुराण
  16. मत्स्य पुराण
  17. गरुड़ पुराण
  18. ब्रह्माण्ड पुराण

इन 18 पुराणों में ब्रह्म पुराण सबसे प्राचीन है। इसके अतिरिक्त दो और महत्वपूर्ण ग्रंथ हैं जो महाकाव्य के रूप में हैं। इन्हें भारतीय इतिहास के प्रमुख साहित्यिक ग्रंथ के रूप मे स्वीकार किया जाता है।

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